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Have u experience Divine Blessings ever? If no,than come & experience it by performing Bhagwan Shri Dwadash Madhav Parikrama.  




                                                    Press Release

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भगवान् श्री शंख और संकष्टहर माधव की प्रदक्षिणा से द्वादश माधव परिक्रमा का तीसरा दिन संपन्न

 तीर्थराज प्रयाग, कार्तिक त्रयोदशी 16 नवम्बर 2021, सनातन धर्म की एक मान्यता के अनुसार जिस स्थान के अधिष्ठाता देव की उपेक्षा होती है, वह स्थान कभी भी सुखी और सम्पन्न नहीं रहता! बहुत कम लोगों को यह मालूम होगा की प्रयागराज के स्थान देवता स्वयं भगवान् श्री हरी हैं! भगवान् श्री हरी यहाँ भगवान् श्री माधव के रूप में विराजमान हैं! पूरे ब्रम्हांड में केवल प्रयाग को ही भगवान् ने यह गौरव प्रदान किया है! भगवान् स्वयं प्रयाग के अधिष्ठाता हैं! इसी कारण यह स्थान तीर्थराज कहलाता है! यह भी तथ्य है की नाम के अनुरूप यह स्थान किसी भी दृष्टिकोण से देखने वाले को तीर्थराज नहीं दिखता! पता है इसका कारण क्या है? जगतनियंता स्वयं इस स्थान पर विराजमान हैं, वह भी एक नहीं बारह स्वरूपों में, फिर भी यह स्थान श्री हीन है,भौतिक स्तर पर भी और मानसिक स्तर पर भी! हमारा नहीं बल्कि आम लोगों का ऐसा मत है! जब भगवान् को लोग नहीं पूंछते तो वह स्थान स्वतः श्री हीन हो जाता है,क्योकि श्री अर्थात माता श्री लक्ष्मी भगवान् की शक्ति हैं! भगवान् को क्या चाहिए, उन्हें तो केवल सम्मान और समर्पण चाहिए! यदि हम भगवान् के आगे सर झुका लेते हैं अर्थात दर्शन/परिक्रमा करते हैं तो हम भौतिक, आध्यात्मिक, मानसिक स्तर पर निश्चित मालामाल हो जायेंगे! आज दुर्भाग्य है की भगवान् श्री द्वादश माधव को बहुत काम लोग जान रहे हैं!प्रयागवासियों को चाहिए की बढ़ चढ़ कर भगवान् की परिक्रमा करें! जिससे व्यक्तिगत और सामूहिक कल्याण होगा!यह विचार भगवान् श्री द्वादश माधव परिक्रमा तीर्थराज प्रयाग के पुनः स्थापनाकर्ता आध्यात्मिक गुरु स्वामी श्री अशोकजी महाराज ने आज परिक्रमा के तीसरे दिन भगवान् श्री संकष्टहर माधव पीठ पर परिक्रमावासियों से कहे ! इस पीठ के महंथ स्वामी श्री रामानुजाचार्य महाराज ने संत श्री प्रभुदत्त ब्रह्मचारी जी  के परिक्रमा में योगदान पर प्रकाश डाला !परिक्रमा का नेतृत्व महंथ  स्वामी श्री अवधेशजी महाराज एवं श्री आदित्य जी महाराज ने किया !

प्रयाग के प्रत्येक निवासी एवं तीर्थ सेवनार्थी के लिए यह कई जन्मो के बाद प्राप्त हो रहा अत्यंत दुर्लभ अवसर है! सभी को इसमें बढ़ चढ़ कर भाग लेना चाहिए क्योकि तीर्थराज के अधिष्ठाता देव की परिक्रमा से स्थान की जागृति होती है! जिससे दरिद्रता का नाश होता है! कुवृतियों का नाश होता है ,सदभाव और प्रेम का संचार होता है जिससे प्रत्येक प्राणी का जीवन सुन्दर और संपन्न बनता है!

जारीकर्ता - तीर्थराज पाण्डेय, सदस्य प्रबंध, श्री द्वादश माधव परिक्रमा , प्रयाग !

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