Retreat@KumbhaCity.Recharge ur self with Dwadash Madhav Parikrama.Get everything U r searching4Years

Have u experience Divine Blessings ever? If no,than come & experience it by performing Bhagwan Shri Dwadash Madhav Parikrama. This spiritual summit offers volunteering & Faith tourism opportunity  




Press Release

This press release is for media person/freelance journalist: They are requested to take this release and include in there respected publication/channel on a prominent place and our coordinators are authorized to take print of this release and distribute it to local media.

तीर्थराज प्रयाग के अधिष्ठाता देव भगवान् श्री द्वादश माधव की कृपावर्षा के वार्षिक महापर्व वार्षिक परिक्रमा में भाग ले कर वह सब पाएं जिसे पाने को आप वर्षों से प्रयासरत हैं !

 तीर्थराज प्रयाग की पांच दिवसीय अति पावन भगवान् श्री द्वादश माधव वार्षिक परिक्रमा, इस वर्ष भी 14 नवम्बर से आयोजित है!

सनातन धर्म की एक मान्यता के अनुसार जिस स्थान के अधिष्ठाता देव की उपेक्षा होती है, वह स्थान कभी भी सुखी और सम्पन्न नहीं रहता! बहुत काम लोगो को यह मालूम होगा की प्रयाग अर्थात इलाहाबाद के स्थान देवता स्वयं भगवान् श्री हरी हैं! भगवान् श्री हरी यहाँ भगवान् श्री माधव के रूप में विराजमान हैं! पूरे ब्रम्हांड में केवल प्रयाग को ही भगवान् ने यह गौरव प्रदान किया है! भगवान् स्वयं प्रयाग के नगर देवता हैं! इसी कारण यह स्थान तीर्थराज कहलाता है! यह भी तथ्य है की नाम के अनुरूप यह स्थान किसी भी दृष्टिकोण से देखने वाले को तीर्थराज नहीं दिखता! पता है इसका कारण क्या है? जगतनियंता स्वयं इस स्थान पर विराजमान हैं, वह भी एक नहीं बारह स्वरूपों में, फिर भी यह स्थान श्री हीन है,भौतिक स्तर पर भी और मानसिक स्तर पर भी! हमारा नहीं बल्कि आम लोगों का ऐसा मत है! जब भगवान् को लोग नहीं पूंछते तो वह स्थान स्वतः श्री हीन हो जाता है,क्योकि श्री अर्थात माता श्री लक्ष्मी भगवान् की शक्ति हैं! भगवान् को क्या चाहिए, उन्हें तो केवल सम्मान और समर्पण चाहिए! यदि हम भगवान् के आगे सर झुका लेते हैं अर्थात दर्शन/परिक्रमा करते हैं तो हम भौतिक, आध्यात्मिक, मानसिक स्तर पर निश्चित मालामाल हो जायेंगे! आज दुर्भाग्य है की भगवान् श्री द्वादश माधव को बहुत काम लोग जान रहे हैं!प्रयागवासियों को चाहिए की बढ़ चढ़ कर भगवान् की परिक्रमा करें! जिससे व्यक्तिगत और सामूहिक कल्याण होगा! सनातन ज्ञान के अनुसार सृष्टि का पहला यज्ञ भगवान श्री ब्रह्मा जी ने जिस स्थान पर किया था उसे ही प्रयाग कहा जाता है !इसी यज्ञ की सुरक्षा भगवान श्री विष्णु पूरे सौ वर्षों तक अपने बारह स्वरूपों में करते रहे ! भगवान के यही स्वरुप द्वादश माधव कहलाये! इन्ही भगवान की परिक्रमा का विधान प्रयाग के प्रथम वासी और भगवान श्री ब्रह्मा जी के पुत्र श्री भारद्धाज मुनि ने भगवान श्री शंकर जी के आशीर्वाद से बनाया था! भारद्धाज मुनि के अनुसार भगवान की इस पावन परिक्रमा को करने से प्राणी के जन्मो के संचित पाप कटते हैं और पुण्य का उदय होता है! प्रयाग में किसी प्रकार का कर्मकांड अनुष्ठान संस्कार चाहे वह कल्पवास हो पिंडदान तर्पण अस्थिविसर्जन मुंडन यज्ञोपवीत सहित कोई भी अनुष्ठान हो तब तक पूर्ण और फलित नहीं होता जब तक भगवान श्री द्वादश माधव की परिक्रमा न की जाये! जिस प्रकार तीर्थराज से सभी तीर्थों की उत्पति मानी गयी है उसी प्रकार सभी परिक्रमाओं की भी उत्पति श्री द्वादश माधव परिक्रमा से मानी जाती है! सतयुग त्रेता द्वापर और कलियुग के प्रारम्भिक वर्षों तक यह सबसे बड़ी परिक्रमा रही है! भगवान श्री राम ने भी प्रयाग आने पर यह परिक्रमा की थी! ऐसा बताया जाता है की मुगलों ने इसे खंडित कर दिया था ! ६०० वर्षों बाद भगवान श्री माधव जी की कृपा से यह परिक्रमा पुनः प्रारम्भ हो रही है! आध्यत्मिक गुरु पूज्य स्वामी श्री अशोकजी महाराज के अथक प्रयासों के बाद गत तीन वर्षों से यह परिक्रमा शुरू हो चुकी है! गत वर्ष 5 दिवसीय वार्षिक परिक्रमा का भी सफलता पूर्वक आयोजन किया जा चुका है! इस वर्ष की 5 दिवसीय परिक्रमा 14 नवंबर को प्रातः 9.30 पर इस्कॉन मंदिर से प्रारम्भ होगी! चार रात्रि विश्राम कर पांचवे दिन 18 नवंबर को इस्कॉन मंदिर में ही परिक्रमा का समापन होगा!

भक्तों के लिए यह सुअवसर है की भगवान् की अति पावन परिक्रमा में भाग ले कर जन्मों के पुण्य के उदय होने का फल प्राप्त कर सकते हैं! भक्तों के 5 दिन ठहरने, भोजन, प्रसाद की व्यवस्था इस्कॉन मंदिर बलुआघाट में की गयी है! सभी इक्छुक भक्तों से निवेदन है कि अपना रजिस्ट्रेशन करा लें अन्यथा मौके पर असुविधा का सामना करना पड़ सकता है! श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस्कॉन मंदिर में एक केंद्र भी खोल गया है! जहाँ से रजिस्ट्रेशन एवं जानकारी प्राप्त की जा सकती है! आचार्य श्री पूर्णकान्त जी की देखरेख में यह केंद्र काम कर रहा है! परिक्रमा की हेल्पलाइन 09452095265 पर दिन भर सहायता उपलब्ध रहेगी! http://dwadashmadhavparikrama.cfsites.org परिक्रमा क़ी आधिकारिक वेबसाइट है,जिसके माध्यम से सभी जानकारी प्राप्त क़ी जा सकती है! कोई भी भक्त, श्रद्धालु http://facebook.com/dwadashmadhavparikrama पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज कर अपडेट रह सकता है! जो भी भक्त किन्ही कारणों से परिक्रमा में भाग नहीं ले पा रहे हैं! उन्हें चाहिए कि वे मार्ग में परिक्रमावासियों का दर्शन एवं स्वागत करें! इस तरह वे पुण्य के भागी बन सकेंगे!

स्थानीय सांसदों, विधायकों एवं जन प्रतिनिधियों से विशेष अनुरोध है कि वे परिक्रमा में बढ़ चढ़ कर भाग ले! परिक्रमा मार्ग की सड़कों को बनवाएं! भौतिक स्थापनाओं/सुविधाओं का विकास करें और परिक्रमा के विकास के लिए सहयोग और योगदान करें!

प्रयाग के प्रत्येक निवासी एवं तीर्थ सेवनार्थी के लिए यह कई जन्मो के बाद प्राप्त हो रहा अत्यंत दुर्लभ अवसर है! सभी को इसमें बढ़ चढ़ कर भाग लेना चाहिए क्योकि तीर्थराज के अधिष्ठाता देव की परिक्रमा से स्थान की जागृति होती है! जिससे दरिद्रता का नाश होता है! कुवृतियों का नाश होता है ,सदभाव और प्रेम का संचार होता है जिससे प्रत्येक प्राणी का जीवन सुन्दर और संपन्न बनता है!
जारीकर्ता

आध्यात्मिक गुरु पूज्य स्वामी श्री अशोकजी महाराज        पूज्य आचार्य दास

संरक्षक:श्रीमाधवकुल एवं तत्वज्ञान डिवाइन मिशन  प्रेसीडेंट इस्कॉन मंदिर,इलाहाबाद

9452095265                                                               7607248882

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